
"सितम शबाब का ढाने वाले,
अपनी आँखों से पिलाने वाले,
जा! तुझे नींद नहीं आएगी,
ओ! मेरी नींद उड़ाने वाले,
तेरा दिल भी कहीं खो जाएगा,
वो मेरी नींद चुराने वाले,
नींद खुलते ही फ़ना होते हैं,
यक़ ब यक़ ख़्वाब में आने वाले,
तुम्हें ता'शब कोई सताएगा,
मुझे कल रात सताने वाले,
इश्क़ की जंग में वो 'राज़' जीता करते हैं,
रूठे मेहबूब को चुटकी में मनाने वाले..।।"
संजय कुमार शर्मा 'राज़'
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