
"सितम ग़रीब पे ढाने वाले,
डरे हुवों को डराने वाले,
तेरी बुनियाद ज़मीं पर होगी,
बड़ी मीनार बनाने वाले,
पहला पत्थर वो ही मारे, जो ग़ुनहगार ना हो,
किसी बेग़ुनाह पे इल्ज़ाम लगाने वाले,
नहीं मिटेगा, नाम मेरा है,
वो मेरा नाम मिटाने वाले,
मैक़दे बंद हैं, मिलेगी क्या....?
'राज़' आँखों से पिलाने वाले।।"
संजय कुमार शर्मा 'राज़'
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