
"मै को मै में मिला दिया उसने,
मैक़शी का सिला दिया उसने,
जाना उसने के 'राज़' आशिक़ है,
दीदों से मै पिला दिया उसने,
अपनी सांसों के नर्म झोंकों से,
मेरी हस्ती हिला दिया उसने,
सूख कर वो जो झड़ने वाला था,
मिरा गुल फिर खिला दिया उसने,
नर्म होठों से लबों को छू कर,
मरते को फिर जिला दिया उसने।।"
संजय कुमार शर्मा 'राज़'
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