बहुत चीखेगी मेरी ख़ामोशी
शायद इतना
की तुम्हारे कान
गल जाएं
सड़ जाएं
मेरे जाने के बाद
और फिर तब
शायद तब
समझोगे तुम
मेरे शब्दों की कीमत ।।
मेरी हर बात
मेरी वो हर बात
जो तुम कभी
ना सुन सके
बेचैन कर देंगी तुम्हे
मेरे जाने के बाद
और फिर तब
शायद तब
समझोगे तुम
मेरे छटपटाने का राज ।।
तुम्हारी जेब में
हाँ वही
दिल के पास वाली
कुछ फटे सपने मिलेंगे तुम्हें
मेरे जाने के बाद ।।
और फिर तब
शायद तब
समझोगे तुम
मेरा आंसू भरा अट्टहास ।।
देखो ! वो गाना
बिलकुल वही
जो गुनगुनाते थे हम साथ
पानी में बहता मिलेगा तुम्हें
मेरे जाने के बाद
और फिर तब
शायद तब
समझोगे तुम
मेरे संगीतमय रुदन का
हर एक सुर - ताल ।।
मेरे जाने के बाद ।।
संजना अभिषेक तिवारी
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