बहुत शिद्दत से चाहा
था उन्हें
अब उतनी ही शिद्दत
से नफ़रत
भी पाल रहे हैं .........
जिन क़दमों के पीछे
चले थे
आँखे मूंदे
अब उन आँखों में
अंगारे डाल
रहे हैं........
सीता को मिला ना
इन्साफ
ना मिलेगा
उर्मिला को कभी
इसलिए
खुद को हम अब
काली मान
रहे हैं......
काली मान रहे है..
...................संजना तिवारी
Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY