
संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डा•भीमराव अम्बेडर को समर्पित..
मानव,मानव पर संकट था
मानवता पर थी विपदा भारी
एक वर्ग डरा सहमा सा था
एक वर्ग था अत्याचारी।
शदियों तक यह होता रहा
मानव,मानव को ढोता रहा
विधाता आखिर कब तक सहता
कब तक वो भी खामोश रहता
सुन कर दीन की करूण पुकार
ईश्वर ने लिया स्वयं अवतार
अम्बेडकर के वेष मे आकर
दलितो के बने खेवनहार
ऊँच-नीच का भेद मिटाया
समानता का दीप जलाया
भारत का संविधान बना कर
वंश-कुल का मान बढ़ाया
कवि
संदीप "अलबेला "
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