चुहिया रानी पहने के लहंगा
पहुँच गई स्कूल
जल्दी -जल्दी मेँ वह पेँसिल
घर पे आई भूल
टीचर भालूजी ने अंग्रेजी के
कुछ शब्द लिखने को बोला
यह सुनकर चुहिया जी को
झट से आ गया रोना
चुहिया जी का रोना सुनकर
भालूजी गुस्साए
क्योँ रोती हो ? मुझे बताओ
मोटी छड़ी दिखाए
चुहिया रानी ने रो - रोकर
सारा हाल सुनाया
फिर न होगी गलती ऐसी
भालू को ये विश्वास दिलाया
चुहिया जी की बातेँ सुनकर
भालूजी मुस्काए
अच्छे बच्चे कभी न रोते
चुहिया को समझाए
स्कूल जाने से पहले वह अब
बैग अपना चेक करती है
फिर शाला मेँ जाकर
खूब मजे से पढ़ती है
सागर यादव 'जख्मी'
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