कविता: मैं बेटा मानवता का
S k soyeb
मैं बेटा मानवता का
मानवता की बात करता हूँ
धर्म समुदाय से ज़्यादा
इंसानियत में विश्वास रखता हूँ
इन धर्म के कारण लोग
एक-दूसरे से दूर हुए
भूल गए दुःख-दर्द लोगों का
अपने वचनों में लीन हुए
धर्म को मानने से पहले
तुम मानवता को जानो
हत्या करते हो इंसानियत की
और धर्म गुरु कहलाते हो
जात-पात की सोच से निकलो
निकलो खोखले विचारों से
ख़ून तो बहा दिया है तुमने
और कितना लहू निकालोगे
चलकर देखो मानवता पर तुम
सब धर्म ज्ञान हो जाएगा
मानवता ही श्रेष्ठ है
पग-पग पर तुम्हें समझ आएगा
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