Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
Administrator

मैं बेटा मानवता का

 

कविता: मैं बेटा मानवता का


S k soyeb

मैं बेटा मानवता का

मानवता की बात करता हूँ

धर्म समुदाय से ज़्यादा

इंसानियत में विश्वास रखता हूँ

इन धर्म के कारण लोग

एक-दूसरे से दूर हुए

भूल गए दुःख-दर्द लोगों का

अपने वचनों में लीन हुए

धर्म को मानने से पहले

तुम मानवता को जानो

हत्या करते हो इंसानियत की

और धर्म गुरु कहलाते हो

जात-पात की सोच से निकलो

निकलो खोखले विचारों से

ख़ून तो बहा दिया है तुमने

और कितना लहू निकालोगे

चलकर देखो मानवता पर तुम

सब धर्म ज्ञान हो जाएगा

मानवता ही श्रेष्ठ है

पग-पग पर तुम्हें समझ आएगा

 


Powered by Froala Editor

LEAVE A REPLY
हर उत्सव के अवसर पर उपयुक्त रचनाएँ