कविता:- इंसानियत का दहन हुआ
S k soyeb
ईश्वर ने इंसान बनाए
इंसानों ने धर्मों को बनाए
धर्मों ने जातियाँ बनाई
जातियों ने ऊँच-नीच बनाए
ऊँच-नीच ने भेदभाव बनाए
भेदभाव ने अलग किए
मन में हिंसा का बोध हुआ
लोग एक-दूसरे के शत्रु हुए
शत्रु द्वारा हत्या हुई
इंसानियत का दहन हुआ
कविता: पैसा बड़ा या ईमान
S k soyeb
भीड़ देखकर व्यक्ति गया
चुपचाप बिन कहे १०० रुपए रख दिया
नज़र पड़ी जब भीड़ की पैसे पर
ले भगदड़ आरंभ हुआ
एक पैसे के कई मालिक
सब जताएँ हक़ उस पर
आया व्यक्ति पास उनके
जनाने उनके पैसों का प्रमाण
खाए कसम कोई अल्लाह की, कहे कोई राम
देख लो प्रमाण, पैसा बड़ा या ईमान
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