Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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इंसानियत का दहन हुआ

 

कविता:- इंसानियत का दहन हुआ

S k soyeb

ईश्वर ने इंसान बनाए

इंसानों ने धर्मों को बनाए

धर्मों ने जातियाँ बनाई

जातियों ने ऊँच-नीच बनाए

ऊँच-नीच ने भेदभाव बनाए

भेदभाव ने अलग किए

मन में हिंसा का बोध हुआ

लोग एक-दूसरे के शत्रु हुए

शत्रु द्वारा हत्या हुई

इंसानियत का दहन हुआ



कविता: पैसा बड़ा या ईमान

S k soyeb

भीड़ देखकर व्यक्ति गया

चुपचाप बिन कहे १०० रुपए रख दिया

नज़र पड़ी जब भीड़ की पैसे पर

ले भगदड़ आरंभ हुआ

एक पैसे के कई मालिक

सब जताएँ हक़ उस पर

आया व्यक्ति पास उनके 

जनाने उनके पैसों का प्रमाण 

खाए कसम कोई अल्लाह की, कहे कोई राम

देख लो प्रमाण, पैसा बड़ा या ईमान

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