कविता:-एक परीक्षा जीवन की
S K Soyeb
एक परीक्षा विद्यालय की,
एक परीक्षा जीवन की।
दोनों हमें सिखाती हैं,
कुछ कम तो, कुछ ज़्यादा,
लेकिन कुछ न कुछ बताकर जाती हैं।
एक सिखाती है जीवन जीने को लेकर,
एक ख़ुद व्यावहारिक करके दिखाती है।
एक दुःख-मुसीबत को पन्नों पर दिखाती है,
तो एक ख़ुद दुःख-मुसीबत बनकर, पन्नों जैसी आती है।
ये खेल भी मानो कैसा,
हर जगह परीक्षाओ का घेरा है।
कभी स्कूल पर, तो कभी ज़िंदगी भर।
तम जाये शायद मौत तक?
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