Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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एक परीक्षा जीवन की

 

कविता:-एक परीक्षा जीवन की

S K Soyeb

एक परीक्षा विद्यालय की,

एक परीक्षा जीवन की।

दोनों हमें सिखाती हैं,

कुछ कम तो, कुछ ज़्यादा,

लेकिन कुछ न कुछ बताकर जाती हैं।


एक सिखाती है जीवन जीने को लेकर,

एक ख़ुद व्यावहारिक करके दिखाती है।

एक दुःख-मुसीबत को पन्नों पर दिखाती है,

तो एक ख़ुद दुःख-मुसीबत बनकर, पन्नों जैसी आती है।


ये खेल भी मानो कैसा,

हर जगह परीक्षाओ का घेरा है।

कभी स्कूल पर, तो कभी ज़िंदगी भर।

तम जाये शायद मौत तक?




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