दलित पूछें चमार से
S k SOYEB
क्या-क्या झेलना पड़ता है तुम्हें बाज़ार में
धुत्कारे, निकाले, लात मारे तो और है
जीता हूँ स्वाभिमान हार के
ये ज़िंदगी का सबसे बड़ा पाप है
दलित पूछें चमार से
क्या-क्या सुनना पड़ता है तुम्हें बाज़ार में
डाँट, फटकार, गालियाँ तो और है
दूसरों की झूठी बातों पर हामी भरो
ये खुद में खुद की हार है
दलित पूछें चमार से
क्या-क्या मिलता है तुम्हें बाज़ार में
अपमान, जिल्लत, ठोकर तो और है
मिलता नहीं श्रेय हमें हमारे कामों का
इससे ज़्यादा बदनसीबी और क्या है
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