राजनीति का दौर है जब तक
लाठी जिसकी भैंस उसी की
कैसा भी नेता हो चाहे
फिर तो देखो शान उसी की
कैसे भी वो शब्द. बोल ले
चित्त उसी की पट्ट उसी की
मार कुन्डली ऐसे बैठा
जैसे ये जागीर उसी की
जो इनकी औकात जान ले
फिर तो भैया जीत उसी की
धन्धा चाहें गन्दा ही हो
मान उसी का शान उसी की
जितना ज्यादा झूठा नेता
उतनी बडी रियासत उसी की
जितना झूठा नेता होगा
उतनी सफल राजनीति उसी की
रूपा शर्मा
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