बिहारी मेरा घर भी ब्रज बना दोगे तो क्या होगा
मुझे चरणों की छाया मे बिठा लोगे तो क्या होगा
तुम्ही ने व्रन्दावन मे कभी दावानल बुझाई थी
मेरी भी आग इस दिल की बुझा दोगे तो क्या होगा
बिहारी मेरा घरभी ब्रज बना दोगे तो क्या होगा
तेरे मिलने को मैं मोहन मैं सारा दिन तरसती हूं
पता खुद अपने घर का तुम बता दोगे तो क्या होगा
बिहारी मेरा घर भी ब्रज बना दोगे तो क्या होगा
मेरे गोपाल गिरधारी मेरे गोपाल बनवारी
मुझे भी अपनी सखियों मे मिला लोगे तो क्या होगा
बिहारी मेरा घर भी ब्रज बना दोगे तो क्या होगा
रूपा शर्मा
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