जीवन की श्वास है, कण कण हरि वास है,
अणु के अंतर तक , चलता रहता रास है ।
' रवीन्द्र '
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जीवन की श्वास है, कण कण हरि वास है,
अणु के अंतर तक , चलता रहता रास है ।
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