ज़िन्दगी ख़्वाब है, ख़्वाब में गुलशन,
लें फूल या कांटे , बस यही उलझन ।
' रवीन्द्र '
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ज़िन्दगी ख़्वाब है, ख़्वाब में गुलशन,
लें फूल या कांटे , बस यही उलझन ।
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