याद में चेहरा कोई, निशां कोई, परचम नहीं,
दुखा जो दिल पराया, पहचान-ए-मज़हब नहीं ।
' रवीन्द्र '
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याद में चेहरा कोई, निशां कोई, परचम नहीं,
दुखा जो दिल पराया, पहचान-ए-मज़हब नहीं ।
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