कोई बस्ती, कोई कूचा, या कोई शहर नहीं,
कौन सी जगह है, जहाँ तू या तेरी लहर नहीं ।
' रवीन्द्र ',
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कोई बस्ती, कोई कूचा, या कोई शहर नहीं,
कौन सी जगह है, जहाँ तू या तेरी लहर नहीं ।
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