तपिश-ए-आफ़ताब से, इतना भी ना डरा करो,
इलज़ाम खुद तुम पर है, धरती पे ना धरा करो ।
' रवीन्द्र '
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तपिश-ए-आफ़ताब से, इतना भी ना डरा करो,
इलज़ाम खुद तुम पर है, धरती पे ना धरा करो ।
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