वक़्त के दरिया का, इस तरह मिला साहिल,
दो पल बिसरा दिये, दो दरे-उम्मीद दाख़िल ।
' रवीन्द्र '
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वक़्त के दरिया का, इस तरह मिला साहिल,
दो पल बिसरा दिये, दो दरे-उम्मीद दाख़िल ।
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