उंगलियों में गिनते रहे
भूले बिसरे दिन....
बहुत याद आते हैं वो
मीठे सच्चे वाले दिन....
खाते थे कसम अपनों की
नही रह सकते थे हम
जिनके बिन.....
बहुत याद आते हैं वो
गुड़ से भी मीठे ईमली वाले दिन....
● रमाकान्त निगम
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उंगलियों में गिनते रहे
भूले बिसरे दिन....
बहुत याद आते हैं वो
मीठे सच्चे वाले दिन....
खाते थे कसम अपनों की
नही रह सकते थे हम
जिनके बिन.....
बहुत याद आते हैं वो
गुड़ से भी मीठे ईमली वाले दिन....
● रमाकान्त निगम
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