Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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इन्हें कितना जोडूं

 

गीन इश्तहारों से
इन्हें कितना जोडूं
और घटाऊं .....
दरकती दीवारों के
अतीत को किस आईने में
ख़ुद को छुपाऊं....
जिजीविषा के मौन अक्षरों पर
कौन सी स्याही से
दर्द की इबारत लिखूं...
क्या करूं मैं
शीशे की अलमारियों में
रखे इन चमकते
सम्मानों का.....
=रमाकांत निगम








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