Ramakant Nigam
odtSspeonr909fh3al1740mlu15mlf4flt3f9imgucuu71hht1c1h7117156 ·हम दैनिक अखबार से
हर रोज फेंक दिये जाते हैं
हर किसी के माकान पर .......
वर्गीकृत विज्ञापन की तरह लोग
हमे पढ़ कर खरीद लेते है
झूंटे स्पनो की तरह खुद को
बेच कर .....!!!!!
● रमाकान्त निगम
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