Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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गाँव

 

गाँव

खेत हरे-भरे,

लहलहाते ,

झूमते-गाते |

पतली सी ,

पगडंडीया,

खुरो की छाप उन पर |

टन-टन ,

बजती घंटिया ,

सामूहिक एकता ,

चरते पशु ,

मस्त किसान ,

रिमझिम बारिश की फुहार |

जीवन अटूट ,

लयबद्ध प्रवाह ,

आज मैंने गाँव जो देखा |

कवि -  राकेश शर्मा




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