तेरे इंतज़ार में तकते रहे
राह हम अपनी गली की
अब भी हम गमगीन नही
रखते हैं उम्मीद हम अब भी
रात के अंधेरे में जरुर आओगी
हक़ीक़त मे न सही कोई बात नही
इंतज़ार करेंगे हम तेरा आज ख़्वाबों मे
शर्म आती होगी शायद दुनिया केसामने
ख़्वाबों में चले आने मे रुकावट नही होगी।
Rajesh Singh
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