कोहरे में डूब गया गांव ।
सूरज ने धरे नही पांव ।।
मुई धूप दगा दे गयी
गरमी सब साथ ले गयी
आया बर्फीला मौसम
बसने को ढूंढ रहा ठाँव ।।
थका श्रमिक काँपने लगा
मालिक दिन नापने लगा
हल्की न हों तिजोरियाँ
ऐसा कुछ लगा रहा दांव ।।
बस्ती है कथरी ओढ़े
रात गयी पांव सिकोड़े
घेर लिया अंधियारे ने
डसती है पीपल की छाँव ।।
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राजेन्द्र प्रकाश वर्मा
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