लॉस एंजिल्स के फुटपाथों पर
सुबह शाम चलते चलते
पूछा है मैंने कितनी बार अपने से
क्या है मेरे जीने का मकसद ?
शिकागो में लेक्स के किनारे
अकेले घूमते घूमते भी
यह पृश्न कई बार नाचा है
मेरी आखों के सामने
ऋषिकेश के गंगा किनारे के
आश्रमों में बैठकर भी
बार बार सोचा है मैने
क्या है मेरे जीने का मकसद ?
बरसों बीत गए
नहीं मिला मुझे अब तक
इस सवाल का जबाब
पर मेरा प्रभु बार बार आकर
फुसफुसाता है मेरे कानों में
खोजना छोड़ दो, बेटे
जीना शुरू कर दो
Radhakrishna Arora
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