मेरे शब्दों को मैंने प्रेरणा के स्वर दिए तो हैं,
यथा संभव सभी प्रश्नों के भी उत्तर दिए तो हैं |
अगर संकल्प ही हों क्षीण तो निश्चित पराजय है,
तुम्हे प्रारब्ध ने हर मोड़ पर अवसर दिए तो हैं |
लुटा डाले हैं किंचित व्यर्थ इसमें दोष किसका है,
तुम्हारे श्वांस इश्वर ने तुम्हे गिनकर दिए तो हैं
हों कृत संकल्प तो बाधा स्वयं रस्ता दिखाती हैं,
तुम्हारी देह में भी हौसले जमकर दिए तो हैं |
बचा लो इस धरा को नष्ट होने से जो तुम चाहो,
प्रकृति ने भी ये संदेशे, तुम्हे अक्सर दिए तो हैं |
हमेशा सच कहा है "आरसी" क्यों झूठ बोलेगा,
हो शंकित तुम तो तुमको हाथ और पत्थर दिए तो हैं |
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आर० सी० शर्मा "आरसी "
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