हम शिवा के पुत्र, गुरु गोविन्द की औलाद हैं,
हम भगत सिंह, राजगुरु, हम बिस्मिलो,आजा़द हैं,
कर्मभूमी कृष्ण की इस परम पावन देश में,
स्वयं मर्यादा प्रतिष्ठित राम जी के वेश में,
द्रोपदी लुटती रहे और भीष्म न खोलें जुबाँ,
किस जगह जाकर रुकेगा दोस्तो यह कारवाँ ?
- आर.सी.शर्मा ’आरसी’
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