सोलर पैनल वेस्ट: भविष्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
[ऊर्जा की जीत, पर्यावरण की हार: किसकी जिम्मेदारी?]
[वेस्ट टू वेल्थ या वेस्ट टू विनाश: भारत के सामने विकल्प]
· प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
भारत की सौर ऊर्जा क्रांति आज दुनिया के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी है। स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विशाल सोलर पार्क, छतों पर लगे पैनल और सरकारी योजनाएं इस परिवर्तन की पहचान बन गई हैं। लेकिन इस चमकते भविष्य के पीछे एक गंभीर और अनदेखा संकट धीरे-धीरे आकार ले रहा है। यह संकट है सोलर पैनल वेस्ट की सुनामी, जो आने वाले वर्षों में पर्यावरण, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए भारी चुनौती बन सकती है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की 2025 रिपोर्टों के अनुसार यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हरा विकास काले कचरे में बदल सकता है।
पिछले एक दशक में भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। सौ गीगावाट से अधिक क्षमता हासिल करना और 2030 तक सैकड़ों गीगावाट का लक्ष्य तय करना राष्ट्रीय आत्मविश्वास को दर्शाता है। सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं, निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। पीएम सूर्य घर योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जैसी पहलों ने लाखों लोगों को सौर ऊर्जा से जोड़ा है। परंतु इस तेज विस्तार के साथ यह भी सच है कि पैनलों की औसत आयु केवल पच्चीस से तीस वर्ष होती है। बीते वर्षों में लगाए गए पैनल अब धीरे-धीरे अनुपयोगी हो रहे हैं। इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी के अध्ययन बताते हैं कि आने वाले दशकों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी और कचरे का रूप ले लेगी।
सोलर पैनल केवल साधारण शीशा या धातु नहीं होते। इनके भीतर सिलिकॉन, एल्यूमीनियम, कॉपर और प्लास्टिक के साथ-साथ लेड, कैडमियम और क्रोमियम जैसे जहरीले तत्व भी मौजूद होते हैं। जब ये पैनल बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के खुले मैदानों या लैंडफिल में फेंक दिए जाते हैं, तो वर्षा जल के साथ इनमें मौजूद रसायन मिट्टी और भूजल में घुल जाते हैं। इससे खेतों की उर्वरता कम होती है और पीने का पानी दूषित होता है। कृषि-प्रधान देश भारत में इसका प्रभाव अत्यंत गंभीर हो सकता है। अनियंत्रित निपटान से माइक्रोप्लास्टिक और विषैली गैसें भी वातावरण में फैलती हैं, जो मानव स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर डालती हैं।
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