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नया मंत्रिमंडलीय गेमप्लान

 

खेती के खिलाड़ीखेल के मंत्री – नया मंत्रिमंडलीय गेमप्लान

[खेती से रिटायरमेंट, खेल से कमबैक — मंत्री जी की डिजिटल लीला]


महाराष्ट्र की राजनीति का मौसम वैसे तो हमेशा ही बदलता रहता है, लेकिन इस बार जो फसल उगी है, वह कुछ खास है। खेत की मेड़ से निकलकर सीधे मैदान में आ गए हैं माननीय माणिकराव कोकाटे। जी हां, जो कल तक बीज, खाद और सिंचाई की बात करते थे, अब बैडमिंटन, बॉक्सिंग और बॉलकी बारीकियों पर ध्यान देंगे। कारण? एक छोटा सा रम्मी वाला वीडियो और उससे भी छोटा, पर घातक, जनता का ध्यान।

विधान परिषद की कार्यवाही चल रही थी। देश की कृषि स्थिति, प्याज की कीमत और किसान आत्महत्याओं पर चर्चा होनी चाहिए थी। पर इन सबके बीच माननीय मंत्री जी डिजिटल कृषि में व्यस्त थे — मोबाइल की स्क्रीन पर बुवाई (या कहें, पत्ते फेंटाई) कर रहे थे। कैमरे की आँख ने पकड़ा, और सोशल मीडिया की आँधी ने उन्हें उड़ा दिया। जो काम विपक्ष सालों से नहीं कर पाया, वो एक क्लिक ने कर दिखाया।

अब कोकाटे साहब ने सफाई दी — मैं तो बस ऐप बंद कर रहा था। बिल्कुल वैसा ही जैसे बच्चा कहता है, "मम्मी, मैं तो सिर्फ स्कूल से मिला होमवर्क देख रहा था, गेम अपने आप खुल गया। सरकार ने भी कमाल की फुर्ती दिखाई — एक ही चाल में मंत्री महोदय की कुर्सी तो नहीं बदली, पर उनका मंत्रालय जरूर बदल दिया। कृषि से सीधा खेल मंत्रालय!

सोचिए, ये कैसा अद्भुत मेल है — जो हाथ खेत जोतते थे, अब वही हाथ बैट उठाएंगे, रैकेट घुमाएंगे और शायद कोई राष्ट्रीय स्पर्धा में फार्म-टू-फिनिशरणनीति लेकर आएंगे। किसानों को अब खेत में पसीना बहाने के बजाय पसीना बहाने का प्रशिक्षण भी मिल सकता है — कुश्ती के अखाड़े में।

यह तो मानना पड़ेगा कि सरकार ने खेल मंत्रालय को खेती-बाड़ी से जोड़ा है, ताकि अगर कोई खिलाड़ी हार जाए, तो उसे कहा जा सके – बेटा, अब गांव जा और खेती कर। और कृषि मंत्री से निकले खेल मंत्री जब खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करेंगे, तो शायद कहेंगे – खेलो बेटा, पर खाद-पानी का ध्यान भी रखना।

अब बात आती है उस वीडियो की। कुछ लोग कह रहे हैं कि वीडियो को गलत ढंग से पेश किया गया, जबकि कुछ का कहना है कि यह राजनीतिक साजिश है। पर एक आम नागरिक के तौर पर हम इतना जरूर पूछ सकते हैं – माननीय, अगर रम्मी ऐप गलती से खुल गया था, तो वह एप्लिकेशन पहले से फोन में था क्यों? और अगर खेल से इतना ही प्रेम है, तो पहले ही खेल मंत्रालय क्यों न लिया?

लेकिन सबकी बात छोड़िए, कोकाटे जी ने अब खेल मंत्रालय संभाल ही लिया है, तो उम्मीद है कि राज्य के खिलाड़ियों को अब मैदान में उतारने से पहले,पत्ते मिलानेकी कला भी सिखाई जाएगी। रम्मी से निकले मार्गदर्शन में अब बैडमिंटन की बिसात भी बिछेगी और क्रिकेट में ब्लफ़भी चलेगा।

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल इंडिया अब मंत्रियों तक भी पहुँच गया है — संसद में ऐप्स चलते हैं, और निर्णय सोशल मीडिया के ट्रेंड्स से होते हैं। कोई कहे या न कहे, लेकिन अब मंत्रालय मिलने की प्रक्रिया कुछ यूं हो गई है — जो पकड़ा गया, वही हारा। जो वायरल हुआ, वही तबादले के काबिल हुआ।

अंत में बस यही कहा जा सकता है कि कोकाटे जी की रम्मी से रवानगी और खेल से वापसी वाली यह यात्रा आने वाले समय के लिए नजीर बनेगी। शायद भविष्य में हर मंत्री को डिजिटल स्वच्छता प्रमाणपत्र देना पड़ेगा — मैं शपथ लेता हूँ कि कार्यवाही के दौरान कैंडी क्रश, रमी सर्कल, या लूडो किंग आदि का उपयोग नहीं करूँगा, चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन। जय हो लोकतंत्र की, जहाँ गेम भी गंभीर हो जाते हैं, और गलती से खुले ऐप से मंत्रालय की किस्मत बदल जाती है।


प्रो. आरके जैन अरिजीत,बड़वानी (मप्र)


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