कंधा
शवयात्रा जा रही थी। राजीव चुपचाप भीड़ में पीछे चल रहा था।
किसी ने टोका, तुम तो उनके सगे भी नहीं थे, फिर कंधा क्यों दिया?
राजीव ने कहा, जब सबने मेरा साथ छोड़ा था, तब यही थे जिन्होंने मुझे इंसान समझा था।
तो?
आज जब इन्हें कंधे की ज़रूरत थी, मैं पीछे कैसे रह जाता?
लोग अवाक् रह गए।
प्रो. आरके जैन "अरिजीत", बड़वानी (मप्र)
![]() |
Powered by Froala Editor


LEAVE A REPLY