प्रसंगवश – दीपावली पर्व विशेष
विश्व को रोशन करता भारतीय प्रकाश-पर्व
[जहाँ जलता है एक दीप, वहाँ जन्म लेती है मानवता]
[दीपावली: परंपरा, पर्यावरण और परिवर्तन का संगम]
जब संध्या का गहरा अंधेरा धरती पर पसरने लगता है, तभी एक छोटा-सा दीप उसका सीना चीरकर आलोक बिखेरता है। वह दीप केवल मिट्टी और तेल का नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और मानवता का प्रतीक है। दीपावली वह पवित्र क्षण है, जब हर घर, हर गली और हर दिल में उजाला नाच उठता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन का वह गीत है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत, निराशा पर आशा की विजय और अंधकार पर प्रकाश की सत्ता को गाता है। दीपावली भारतीय संस्कृति का वह अनमोल रत्न है, जो न केवल भारत, बल्कि विश्व भर में एकता, प्रेम और समृद्धि का संदेश फैलाता है। यह वह पर्व है, जो हमें याद दिलाता है कि एक छोटी-सी लौ भी सबसे घने अंधेरे को मात दे सकती है।
दीपावली का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि भारतीय संस्कृति की गहराई। त्रेता युग में भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए गए थे। यह परंपरा आज भी अयोध्या के सरयू तट पर लाखों दीपों के साथ जीवित है, जो न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का भी गवाह है। इसके अलावा, भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा दीपावली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बनाती है। जैन धर्म में यह पर्व भगवान महावीर के निर्वाण के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जबकि सिख परंपरा में इसे “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में जाना जाता है, जब गुरु हरगोविंद जी ने 52 राजाओं को मुक्त कराया था। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा इस पर्व का एक अभिन्न अंग है। लक्ष्मी समृद्धि और सौभाग्य की प्रतीक हैं, तो गणेश जी हर कार्य में सफलता के मार्गदर्शक। यह पर्व धर्म की सीमाओं को लांघकर आत्मविजय, मुक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। हर दीप, हर पूजा और हर अनुष्ठान हमें सिखाता है कि जीवन का सच्चा प्रकाश भीतर से ही आता है।
दीपावली अब केवल भारत का पर्व नहीं, बल्कि वैश्विक उत्सव बन चुका है। इसे ‘फ़ेस्टिवल ऑफ़ लाइट्स’ के रूप में विश्व भर में पहचान मिली है। लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तक, दीपावली की रोशनी बिखरती है। अमेरिका के व्हाइट हाउस में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ मिलकर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जो सांस्कृतिक एकता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र भवन में भारतीय समुदाय और अन्य देशों के सहयोग से दीपावली को विश्व शांति और सौहार्द के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के पंचांग में वैकल्पिक अवकाश के रूप में मान्यता प्राप्त है। ब्रिटेन में दीपावली को सरकारी समर्थन के साथ एक प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, विशेष रूप से लंदन के ट्राफलगर चौक और 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर, यद्यपि यह राष्ट्रीय अवकाश नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर और न्यूजीलैंड में बसे भारतीय समुदाय इसे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं, जहाँ सिंगापुर में यह राष्ट्रीय अवकाश है और अन्य देशों में पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
नेपाल में दीपावली को ‘तिहार’ के रूप में पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान कौवों, कुत्तों, गायों और बैलों की पूजा के साथ-साथ भाई-बहन के प्रेम को समर्पित ‘भाई दूज’ का आयोजन होता है। यह परंपरा प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का संदेश देती है। मलेशिया, फिजी और मॉरीशस जैसे देशों में दीपावली को राष्ट्रीय अवकाश का दर्जा प्राप्त है। यह वैश्विक स्वीकार्यता दर्शाती है कि दीपावली अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, एकता और प्रेम का उत्सव है।
भारत में दीपावली का उत्सव एक अनूठा सामाजिक और सांस्कृतिक मेला है। यह वह समय है जब हर घर नया रंग-रूप लेता है। दीवारों पर चूने का लेप, रंगोली की सजावट, मिट्टी के दीयों की रोशनी और मिठाइयों की मिठास इस पर्व को जीवंत बनाती है। व्यापारी नए बही-खाते शुरू करते हैं, किसान फसल की खुशी मनाते हैं, और परिवार एक-दूसरे के साथ समय बिताकर रिश्तों को मजबूत करते हैं। बच्चों के लिए यह आतिशबाजी और आनंद का समय है, लेकिन आज के दौर में पर्यावरण के प्रति जागरूकता ने दीपावली को एक नया आयाम दिया है। लोग अब मिट्टी के दीए, प्राकृतिक रंगों से बनी रंगोली और इको-फ्रेंडली उत्सव की ओर बढ़ रहे हैं। अयोध्या में सरयू तट पर जलने वाले लाखों दीप न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को भी दर्शाते हैं। उज्जैन, वाराणसी, मथुरा और हरिद्वार जैसे शहरों में दीपावली का उत्सव अब वैश्विक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यह दृश्य विश्व को संदेश देता है कि दीपावली केवल भारत का नहीं, बल्कि समस्त मानवता का उत्सव है।
दीपावली का सबसे गूढ़ अर्थ है—भीतर के अंधकार को मिटाना। एक छोटा-सा दीप जिस तरह अंधेरी रात को चुनौती देता है, उसी तरह एक सकारात्मक विचार, एक नेक कर्म और एक दयालु भावना पूरे समाज को रोशन कर सकती है। दीपावली हमें सिखाती है कि बाहरी उजाले से पहले भीतर का प्रकाश जलाना जरूरी है। जब हम किसी का दुख बांटते हैं, किसी के जीवन में आशा का दीप
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