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Dr. Srimati Tara Singh
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धान से दुनिया तक

 

धान से दुनिया तक: भारत का पोषण क्रांति अभियान

[स्कूल की थाली से ग्लोबल तक: भारत का पोषण नेतृत्व]

[फोर्टिफाइड चावल की क्रांति: स्वास्थ्य, शक्ति और वैश्विक प्रभाव]



5 नवंबर 2025 की सुबह। पोर्ट मोरेस्बी का बंदरगाह कुछ अलग ही हलचल में था। भारतीय कंटेनर उतर रहे थे—भीतर 20 टन फोर्टिफाइड चावल, जो सिर्फ खाना नहीं, बल्कि जीवन की उम्मीद थी। हर दाने में छिपा था आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12—एक छोटा सा दाना, बच्चों के भविष्य की सुरक्षा। छत्तीसगढ़ की मिलों में पिछले 45 दिन मशीनों की गूँज सुनाई देती रही, दिन-रात काम में लगीं। आटा, पोषक पाउडर और पानी मिलाकर एक्सट्रूडर से तैयार हुए कर्नेल, जो 100 किलो सादे चावल में सिर्फ 1 किलो मिलाकर उसे सुपर-पोषक बना देते। स्वाद बिलकुल वही, पोषण 8-10 गुना तक बढ़ जाता है। यह सिर्फ चावल नहीं था—यह भारत की तकनीक, सोच और वैश्विक पोषण का संदेश था।

पापुआ न्यू गिनी (पीएनजी) में हर दूसरा बच्चा विकास में पीछे है। 49.5% बच्चे स्टंटिंग और 14.1 प्रतिशत वेस्टिंग से जूझ रहे हैं। हर तेरहवाँ बच्चा कुपोषण के कारण अपनी नन्हीं जिंदगी खो देता है। भारतीय चावल पहले से स्कूल मील प्रोग्राम का हिस्सा था, लेकिन अब फोर्टिफाइड वर्जन ने इसे बदल दिया है—एक ही प्लेट में बच्चों की आयरन और अन्य पोषक तत्वों की दैनिक जरूरत पूरी हो जाती है। वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा, “यह चावल हमारे बच्चों की हाइट बढ़ाने का सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है।” यह छोटा सा कदम हज़ारों बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को बचाने की शक्ति रखता है।

फोर्टिफाइड चावल केवल खाना नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सामान्य चावल में पोषक तत्वों से भरे कृत्रिम कर्नेल मिलाए जाते हैं, जिन्हें उच्च तकनीक वाले एक्सट्रूडर मशीनों से तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया सिर्फ वैज्ञानिक रूप से उन्नत नहीं है; यह भारत की वैश्विक पोषण सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। पोषण अभियान केवल निर्यात तक सीमित नहीं है—भारत के 800 जिलों की पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दुकानों में हर बोरी में 1 प्रतिशत एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) अनिवार्य है। देशभर की 925 मिलें (जिनमें छत्तीसगढ़ अग्रणी है) मिलें दिन-रात थकनाहीन मेहनत कर रही हैं, फोर्टिफाइड कर्नेल तैयार कर रही हैं। एफएसएसएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का +एफ लोगो (चावल फोर्टिफाइड है) हर पैकेट पर चमकता है, डब्ल्यूएचओ-कोडेक्स मानकों पर बने इस चावल को पीएनजी, कोस्टा रिका समेत कई देश स्वीकार कर रहे हैं—स्वाद वही, लेकिन शक्ति और पोषण अब वैश्विक स्तर पर भी चमक रहा है।

पीएनजी में जब पहला ट्रक स्कूल पहुंचा, तो बच्चों की तालियों की गूँज ने पूरे यार्ड को हिला दिया। पहले दोपहर में थककर सो जाने वाले बच्चे अब फुटबॉल खेलते हैं, दौड़ते हैं, और अपने उज्जवल भविष्य की झलक दिखाते हैं। एपेडा (एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी) की योजना है कि वहां छोटी फोर्टिफिकेशन यूनिट स्थापित की जाए, ताकि स्थानीय चावल भी पोषण से भर सके। 2030 तक भारत का लक्ष्य है कि 50 देशों के 50 करोड़ बच्चों की थाली में स्वास्थ्य और शक्ति पहुँचे। यह सिर्फ निर्यात का संदेश नहीं, बल्कि यह साबित करता है कि भारत पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।

इस सफलता की असली कहानी छुपी है किसानों की मेहनत, मिलों की निरंतर जुझारूपन और तकनीक के सटीक इस्तेमाल में। हर धान के दाने में उनके संघर्ष की झलक है, हर कर्नेल में उनकी लगन का असर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का यह पोषण अभियान लगातार फैल रहा है। पिछले साल कोस्टा रिका को 12 टन एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) भेजा गया था, जिससे वहां के बच्चों की थाली में पहला पोषण का बीज बोया गया। अब पीएनजी के बाद घाना, नाइजीरिया और मलावी की सरकारी एजेंसियाँ रायपुर की मिल से फोर्टिफाइड चावल खरीद रही हैं, ताकि अपने बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बना सकें। अगले तीन महीनों में पीएनजी को 50 टन और भेजा जाएगा, और 2026 तक 500 टन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह विस्तार केवल व्यापार का मामला नहीं है; यह भारत की वैश्विक पोषण नीति में अग्रणी भूमिका और प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है—एक संकेत कि जब तकनीक, नीति और मेहनत मिलती है, तो राष्ट्र सिर्फ निर्यातक नहीं बल्कि स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में भी विश्व स्तर पर नेतृत्व कर सकता है।

छत्तीसगढ़ का “धान का कटोरा” अब सिर्फ चावल उत्पादन तक सीमित नहीं रहा; यह भारत की वैश्विक पोषण रणनीति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यह कहानी स्पष्ट करती है कि जब तकनीक, नीति और किसानों की मेहनत एक साथ आती है, तो देश सिर्फ कृषि उत्पादक नहीं रह जाता—बल्कि पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। 20 टन फोर्टिफाइड चावल की यह खेप केवल निर्यात का आँकड़ा नहीं है; यह भारत की नई रणनीति है—एक ऐसी ताकत जो बंदूक के बजाय चावल के जरिए दुनिया जीत रही है।


प्रो. आरके जैन अरिजीत, बड़वानी (मप्र)

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