ओ पिता
जल गये तेरे
सत्य, अहिंसा
जब तु जल गया।
रह गये केवल
असत्य, अहिंसा।
आती है तेरी याद
जब तेरे
जनम, मरण दिन।
तुम आवोगे फिर
नहीं रहोगे इधर
करोगे आत्महत्या।
तेरे आदर्श
तेरी बातें
नहीं टिकेंगे आज
लगाएंगे तुझ पर
कोई आरोप।
ओ पिता
इस जग में मत आना
कृपया मत आना।
प्रो.संगमेश ब.नानन्नवर
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