कुछ देर बैठिये गुफ़्तुगू हो जाये
इश्क की दरिया में डूब कर
मियां इश्क की ही पैरवी हो जाये
तकल्लुफ न दो होंठो को सनम
दिलों की बात आँखों से हो जाये
मियां इश्क की ही पैरवी हो जाये
यहाँ वकालत तेरी गुनहगार तेरा
क्या उसकी सिफारिश हो जाये
वो पाये सज़ा में सनम साथ तेरा
तेरी कातिल बाँहों की उसे
क्या सजा मुक़र्रर आज हो जाये
मियां इश्क की ही पैरवी हो जाये
©प्रणव मिश्र'तेजस'
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