उनका हर अंदाज़ ही शरीफ़ाना होता है
अपनी शराकत को भी याद नहीं करता
गौर करता है हर एक बात पर मगर वो
अक्सर खुद को खुद से दख़ल नहीं देता
बड़ा ही निर्विकार निस्पृह रहता है हमेशा
साधुता को जीता है मगर दावा नहीं करता
*
शरीफ़ाना=शरीफ़ / शराकत=हिस्सेदारी
(शिरकत यानी शरीक होना ... शामिल होना-व्यक्ति के रूप में मगर
शराकत शब्द का अर्थ है हिस्सेदारी करना)
- पंकज त्रिवेदी
(16 September 2014)

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