Pankaj Trivedi
सोचा था
मेरे जाने से तुम उदास हो जाओगी
खिडकी के पास बैठकर दूर दूर तक
हरे बांबू के वृक्षों की कतारों को चीरती
क्षितिज पर डूबते सूर्य में ढूँढती होगी
मेरा चेहरा !
- पंकज त्रिवेदी
Powered by Froala Editor
Pankaj TrivediPowered by Froala Editor
LEAVE A REPLY