रुख़सत देनी थी हमें तो इस कदर भी न देते दूसरों की क्या खुद की नज़र से न गिरने देते
घर की टूटी छत के करीब घोंसला बना देते
चिड़िया गज़ब है टूटे हुए को कैसे सजा देते
आदत है इंसान की निज खुशी को ढूँढता है
किसी के वास्ते दुःख छोड़कर खुद मज़ा लेते
- पंकज त्रिवेदी
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