
मेरे शब्द
जो तुम्हें छू जाते है
अंतरमन तक
और
तुम छू जाती हो
मेरे अंतरमन तक ...!
ईश्वर ही तो है
जो प्यार बनकर
बैठ गया है
हम दोनों में !
*
- पंकज त्रिवेदी
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