पहले पहल मुझ से बड़ा काम रखा जाए,
फिर सर मेरे भी कुछ ईनाम रखा जाए।
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ख़ुदा की ख़ुदाई पे मिरा बना रहे भरम,
गुनाह के हिसाब से अंज़ाम रखा जाए।
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अपने दीवानों की फेहरिस्त अगर लिखो,
'बिस्मिल्लाह' से पहले मेरा नाम रखा जाए।
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अब के लौटेगा कासिद हाथ भरे लेकर,
चलो! लिख के इक नया पैग़ाम रखा जाए।
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दूर है मंज़िल पर दिखाई तो देती है,
जश्न का अभी से कुछ इंतज़ाम रखा जाए।
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तुम निबटा तो दो मुझे पर इक शर्त है मिरी,
मिरे ही क़त्ल का मुझ पे इल्ज़ाम रखा जाए।
निलेश शेवगांवकर "नूर"
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