हर मुश्किल में तुम धीर बनो
इतिहास रचो तुम आगे बढ़
हट वक़्त तुम्हारे कब्जे में
एलान करो सिंघासन चढ़
हर कलम तुम्हारी बीती को
एक काव्य बनाने की सोचे
तक़दीर बनाने से पहले
क्यों ख़ुदा ना तेरी रज़ा पूछे
तेरी रस्सी में दुनिया के
कर पैर बधे हो साथ साथ
नतमस्तक क्यों ना हो दुनिया
कर दोनों जोड़े एक साथ
तेरी आँखों में स्वर्ग रहे
पर पावँ टिके हो धरी पर
क्योकि मानवता के अगणित
उपकार पड़े है तेरे पर
तुमसे आशा है भारत को
कर रही घोषणा भारत माँ
बन कर सपूत तुम उस माँ का
गुलज़ार करो हर कारवा
नवनीत पाण्डेय
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