सहारा ढूँढ लो कोई , किनारा ढूँढ लो कोई ।।
अजी ! ईलाज-ऐ-ग़म तुम भी प्यारा ढूँढ लो कोई ।।
ज़मीनों के सवालों को , अमीरों ने उठाया है ।।
किसानों तुम , जवाब अभी , करारा ढूँढ लो कोई ।।
बगावत के बिना हक़ कब मिलें हैं इस जमाने से ।।
जवानों ! आतिशे - दिल में शरारा ढूँढ लो कोई ।।
मुहब्बत के सहारे जिंदगी कट तो नहीं सकती ।।
चलो अब तुम उठो और इक गुजारा ढूँढ लो कोई ।।
सलीबें और तलवारें हैं मेरे सामने अब बस ।।
रुमानी हो अगर तुम तो नज़ारा ढूँढ लो कोई ।।
Narender Sehrawat
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