हाइकु
१
रिश्ता न खून
का , मेरे संग दोस्त
बांटे हो गम।
२
महका प्राण
बने हो संजीवनी
भर के जख्म। ।
३
दे देंगे प्राण
वफादार पन्ना - सा
दोस्ती के नाम।
४
बढ़ाके हाथ
मित्रता भरा साथ
सदा रहेगा।
५
दोस्ती का धर्म
दुखों में देता साथ
छोड़े न हाथ ।
६
बन सुदामा
करूँ नमन दोस्त
बने थे कृष्ण।
७
मैत्री के द्वार
लिखने तेरा नाम
आया है चाँद।
८
सच्चा है मित्र
गले लगे दुखों में
बन कवच ।
९
मैत्री निभा के
मनाता देश - विश्व
मित्रता दिन।
१०
मैत्री की घड़ी
चले आखिरी सांस
दोस्त ! तुम से ।
डॉ मंजु गुप्ता
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