Swargvibha
Dr. Srimati Tara Singh
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रिश्ता न खून

 

हाइकु


१ 

रिश्ता न खून 

का , मेरे संग दोस्त 

बांटे हो गम। 


२ 

महका प्राण 

बने हो संजीवनी 

भर के जख्म।  । 

३ 

दे देंगे प्राण 

वफादार पन्ना -  सा 

दोस्ती के नाम। 

४ 

बढ़ाके हाथ 

मित्रता भरा साथ 

सदा रहेगा।  

५ 

दोस्ती का धर्म 

दुखों में देता  साथ 

छोड़े  न हाथ । 


६ 

बन सुदामा 

 करूँ नमन दोस्त 

बने थे कृष्ण।  



७ 

मैत्री के द्वार 

लिखने तेरा नाम 

आया है चाँद। 


८ 

सच्चा  है मित्र 

गले लगे दुखों में 

बन कवच ।  


९ 

मैत्री निभा के 

मनाता देश - विश्व 

मित्रता दिन।  

१० 


मैत्री की घड़ी

चले आखिरी सांस 

दोस्त ! तुम से ।


डॉ मंजु गुप्ता

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