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Dr. Srimati Tara Singh
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दोहों में रक्षाबंधन

 

दोहों में रक्षाबंधन


शुभकर पूनम - चाँदनीं, बरसे मन के द्वार।
प्रेम बढ़ाने आ गया , रक्षा का त्यौहार।।१


रँगतीं स्नेहिल राखियाँ , दिल का रेगिस्तान।
है हर तार विशेष जो , बाँधे हिन्दुस्तान।।२

रंग - बिरंगी राखियाँ , लाईं अजब बहार।
सजे मॉल बाजार हैं , करें गजब त्यौहार।। 3

रिश्ता भाई - बहन का , रक्षाबंधन पर्व ।
वादा रक्षित बहन से , नाता निभाय सर्व।।४

स्नेह तार ही बहन का , भाई को उपहार ।
इससे बढ़ कर कुछ नहीं , फीका हीरक - हार।। ५

राखी पावन प्रेम की , वादे - रस्म अटूट ।
गहना बंधन नेह का , कहीं न जाए टूट।। ६

लाया रक्षा पर्व है , राखी की सौगात ।
मन में हरियाली भरे , खुशियों की बरसात ।।७

बहनों को सम्मान दें , इसे निभाए देश।
समता, रक्षण ,मित्रता , उत्सव का संदेश ।।८

रक्षित राखी से बहन, कहे सुनहरे तार ।
गर्भ - मृत्यु अपराध है , कन्या है उपहार।। ९

सजा सखी मणिबंध पर, आज बहन का प्यार।
बाँधे वचनों में सभी , पावन राखी तार।।10
सभी भाई बहनों , आत्मीय जनों को पावन रक्षाबंधन पर्व शुभकामना प्रेषित कर रही हूँ।
शुभकामनाओं के साथ

डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई

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