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विश्व किडनी दिवस

 

विश्व किडनी दिवस: स्वस्थ जीवन की ओर एक पहल

महेन्द्र तिवारी  

विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाने वाला एक वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान हैजिसका उद्देश्य लोगों को किडनी के महत्व और किडनी से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। आधुनिक जीवनशैलीबदलती खान-पान की आदतें और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के कारण आज किडनी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहींबल्कि मानव स्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर विषय की ओर समाज का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। दुनिया भर में स्वास्थ्य विशेषज्ञचिकित्सकसामाजिक संगठन और सरकारें इस दिन के माध्यम से लोगों को यह संदेश देती हैं कि किडनी हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है और इसकी सुरक्षा के लिए समय रहते सावधानी बरतना आवश्यक है।

मानव शरीर में सामान्यतः दो किडनी होती हैंजो रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित रहती हैं। ये आकार में भले ही छोटी होती हैंलेकिन शरीर के संतुलन को बनाए रखने में इनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। किडनी का मुख्य कार्य रक्त को शुद्ध करना और शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बनाए रखनेअम्ल-क्षार संतुलन को नियंत्रित करनेरक्तचाप को नियंत्रित करने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किडनी ठीक से कार्य न करे तो शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैंजिससे अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

विश्व किडनी दिवस की शुरुआत वर्ष 2006 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किडनी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। तब से यह दिन हर वर्ष विश्व भर में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग किडनी के स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और समय-समय पर अपनी जांच कराते रहें। आज दुनिया भर में करोड़ों लोग किडनी से संबंधित बीमारियों से प्रभावित हैं। अनुमान है कि विश्व में लगभग 85 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में किडनी रोग से प्रभावित हैं और कई लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं होती। 

किडनी रोगों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनके शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण इसे साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। कई बार लोगों को तब पता चलता है जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी होती है। यदि समय रहते इसका पता चल जाए तो उपचार और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि रोग लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो किडनी फेलियर की स्थिति उत्पन्न हो सकती हैजिसमें मरीज को डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है।

क्रोनिक किडनी रोग यानी सीकेडी आज विश्व स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यह रोग धीरे-धीरे महीनों या वर्षों में विकसित होता है और किडनी की कार्यक्षमता को कम कर देता है। कई अध्ययनों के अनुसार विश्व में लगभग हर दस में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर क्रोनिक किडनी रोग से प्रभावित है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो यह किडनी फेलियर का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में किडनी रोग वैश्विक स्तर पर मृत्यु और बीमारी का एक बड़ा कारण बन सकता है।

किडनी रोगों के कई प्रमुख कारण होते हैंजिनमें सबसे महत्वपूर्ण मधुमेह और उच्च रक्तचाप हैं। ये दोनों बीमारियाँ किडनी की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता को कम कर देती हैं। इसके अलावा मोटापाअसंतुलित आहारधूम्रपानशराब का अत्यधिक सेवनदर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग और पर्याप्त पानी न पीना भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आधुनिक जीवनशैली में लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और तनाव तथा अनियमित दिनचर्या बढ़ गई हैजो किडनी रोगों के जोखिम को और बढ़ाती है।

महिलाओं के संदर्भ में किडनी रोग एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। शोध बताते हैं कि विश्व भर में लगभग 19.5 करोड़ महिलाएं क्रोनिक किडनी रोग से प्रभावित हैं और यह महिलाओं में मृत्यु का आठवां प्रमुख कारण है। हर वर्ष लगभग छह लाख महिलाओं की मृत्यु किडनी रोगों के कारण हो जाती है। महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान होने वाली कुछ जटिलताएँजैसे प्री-क्लेम्पसियाआगे चलकर किडनी रोग का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा महिलाओं में मूत्र संक्रमण की संभावना अधिक होती हैजो यदि समय पर उपचार न मिले तो किडनी तक फैल सकता है। इसलिए महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में किडनी की नियमित जांच और देखभाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

किडनी रोग केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं हैबल्कि यह सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। जब किसी व्यक्ति को किडनी फेलियर हो जाता हैतो उसे नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। यह प्रक्रिया महंगी होती है और कई परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन जाती है। कई देशों में किडनी प्रत्यारोपण ही अंतिम विकल्प होता हैलेकिन इसके लिए उपयुक्त दाता और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि किडनी रोगों की रोकथाम और प्रारंभिक पहचान पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीनासंतुलित और पौष्टिक भोजन करनानमक और तले-भुने भोजन का कम सेवन करनानियमित व्यायाम करना और धूम्रपान-शराब से दूर रहना किडनी के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसके अलावा मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच करानी चाहिएक्योंकि ये दोनों बीमारियाँ किडनी को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। समय-समय पर रक्त और मूत्र परीक्षण कराने से किडनी की स्थिति का पता लगाया जा सकता है और किसी भी समस्या का प्रारंभिक चरण में ही उपचार संभव हो सकता है।

विश्व किडनी दिवस का महत्व इस बात में भी है कि यह समाज को यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। जब लोग किडनी के महत्व को समझेंगे और अपने जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाएंगेतभी किडनी रोगों के बढ़ते खतरे को कम किया जा सकेगा। सरकारों और स्वास्थ्य संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंसस्ती जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएं और गंभीर रोगियों के लिए उपचार की व्यवस्था को मजबूत बनाएं।

अंततः यह कहा जा सकता है कि किडनी हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है और इसका स्वस्थ रहना हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। विश्व किडनी दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि हम अपने जीवन में संतुलित आहारनियमित व्यायामपर्याप्त पानी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनाएंतो किडनी रोगों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। स्वस्थ किडनी ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैऔर इसी संदेश के साथ यह दिवस पूरी दुनिया को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।

ईमेलmahendratone@gmail.com




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