तपती धरती और झुलसता जीवन
-महेन्द्र तिवारी
भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की ऐसी मार झेल रहा है जिसने सामान्य जीवन को गहराई से प्रभावित कर दिया है। दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। कई शहरों में यह 46 से 47 डिग्री तक दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के अनेक क्षेत्रों में हीटवेव और गंभीर हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। मई 2026 की यह गर्मी केवल मौसमी बदलाव नहीं बल्कि एक बड़े जलवायु संकट की चेतावनी मानी जा रही है।
दिल्ली के रिज क्षेत्र में तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि मुंगेशपुर में 46.3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। सफदरजंग केंद्र पर अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 4 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग के अनुसार अगले कई दिनों तक राहत की संभावना बहुत कम है। गर्म हवाएं लगातार चल रही हैं और दोपहर के समय सड़कों पर निकलना कठिन हो गया है।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तापमान 48.2 डिग्री तक पहुंच गया जो देश में सबसे अधिक दर्ज तापमानों में शामिल है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ और पिलानी में तापमान 46 डिग्री से ऊपर पहुंचा। हरियाणा के रोहतक में 46.9 डिग्री तापमान ने लोगों को झुलसा दिया। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी लू का असर लगातार बढ़ रहा है।
गर्मी की इस भयावह स्थिति ने जनजीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। दोपहर के समय सड़कें खाली दिखाई दे रही हैं। बाजारों में भीड़ कम हो गई है। मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है क्योंकि उन्हें खुले आसमान के नीचे काम करना पड़ता है। निर्माण कार्यों में लगे श्रमिक, रिक्शा चालक, डिलीवरी कर्मचारी और खेतों में काम करने वाले किसान लगातार लू का सामना कर रहे हैं। कई लोग चक्कर आने, सिरदर्द, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याओं से अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ा है। जंगलों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाली गैसें तथा तेजी से फैलता शहरीकरण इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में कंक्रीट और डामर की अधिकता के कारण गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है। इसे शहरी ताप द्वीप प्रभाव कहा जाता है। दिनभर सूर्य की गर्मी सड़कों और इमारतों में जमा हो जाती है और रात में भी तापमान कम नहीं हो पाता।
मौसम विभाग के अनुसार मई और जून के महीने उत्तर भारत में सामान्य रूप से गर्म होते हैं लेकिन इस बार तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक है। दिल्ली में मई को सबसे गर्म महीनों में माना जाता है जहां कई बार तापमान 45 डिग्री से ऊपर चला जाता है। इस बार लगातार कई दिनों तक लू चलने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है।
गर्मी का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है बल्कि बिजली और पानी की मांग पर भी पड़ा है। देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है। कई शहरों में लंबे बिजली कट भी देखने को मिल रहे हैं। पानी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और गर्मी के कारण जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं।
कृषि क्षेत्र भी इस गर्मी से प्रभावित हुआ है। खेतों में काम करना कठिन हो गया है। कई फसलों पर गर्म हवाओं का असर दिखाई देने लगा है। सब्जियों और फलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है जिससे आने वाले समय में कीमतों में वृद्धि संभव है। पशुओं के लिए भी यह मौसम बेहद कठिन है। पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं की मृत्यु के मामले भी सामने आ रहे हैं। गांवों में तालाब और छोटे जल स्रोत सूखने लगे हैं जिससे पशुपालन पर संकट बढ़ रहा है।
विद्यालयों में भीषण गर्मी को देखते हुए कई राज्यों में छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं। बच्चों को दोपहर में बाहर निकलने से रोका जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं इसलिए उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत है। शरीर में पानी की कमी होने पर स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है।
सरकार और मौसम विभाग लगातार लोगों को सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। लोगों से कहा गया है कि वे दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें। बाहर निकलते समय छाता या गमछे का उपयोग करें। बुजुर्गों और बच्चों को सीधे धूप में जाने से रोकें। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आए, तेज बुखार हो, सांस लेने में कठिनाई हो या बेहोशी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
गर्मी के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस हो रही है। यदि बड़े स्तर पर वृक्षारोपण नहीं किया गया और प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ेंगी। इसका असर अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक जीवन पर पड़ेगा।
दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग इस समय सुबह जल्दी और रात देर तक ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई देता है। कई क्षेत्रों में गर्म हवा इतनी तेज चल रही है कि कुछ मिनटों तक बाहर खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टॉप और रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग गर्मी से बेहाल दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अत्यधिक गर्मी मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। लगातार ऊंचा तापमान चिड़चिड़ापन, तनाव और थकान बढ़ाता है। नींद प्रभावित होती है और कार्यक्षमता कम हो जाती है। मजदूर वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है क्योंकि उनके पास गर्मी से बचने के पर्याप्त साधन नहीं होते।
भारत में हीटवेव अब केवल मौसमी घटना नहीं रह गई है बल्कि यह राष्ट्रीय चुनौती बनती जा रही है। तेजी से बदलते मौसम संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में हमें और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए केवल सरकारी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे बल्कि समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और ऊर्जा बचत के प्रति गंभीर होना होगा। पेड़ लगाना, जल स्रोतों को बचाना, प्रदूषण कम करना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
यह भी सच है कि प्रकृति बार बार चेतावनी देती है लेकिन मानव समाज अक्सर उसे नजरअंदाज कर देता है। आज उत्तर भारत की झुलसती धरती और 45 डिग्री से ऊपर पहुंचता तापमान इसी चेतावनी का संकेत है। यदि अभी भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी नहीं दिखाई गई तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और कठिन हो सकता है। हीटवेव केवल मौसम की खबर नहीं बल्कि भविष्य का गंभीर संदेश है जिसे समझना और उस पर कार्य करना अब अनिवार्य हो गया है।
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