कैसे अजीत अगरकर के फैसलों ने टीम इंडिया को बनाया वर्ल्ड चैंपियन
- महेन्द्र तिवारी
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 8 मार्च 2026 का दिन एक यादगार तारीख बन गया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 255/5 का विशाल स्कोर बनाया और जवाब में न्यूजीलैंड की पूरी टीम 159 रन पर सिमट गई। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने 4 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार जीता, जबकि पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए संजू सैमसन को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
इस जीत के साथ भारत ने सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं जीती, बल्कि इतिहास भी रच दिया। यह पहली बार था जब किसी टीम ने लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप जीते और साथ ही मेजबान देश के रूप में भी खिताब अपने नाम किया। भारत इससे पहले 2007 और 2024 में भी टी20 विश्व कप जीत चुका था, और अब तीसरी बार इस ट्रॉफी पर कब्जा करके उसने विश्व क्रिकेट में अपनी ताकत का एक बार फिर परिचय दिया।
फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का प्रदर्शन पूरी तरह एकतरफा रहा। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। संजू सैमसन ने 46 गेंदों में 89 रन की शानदार पारी खेली, जबकि अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने तेज अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामक बल्लेबाजी की वजह से टीम ने टी20 वर्ल्ड कप फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर बना दिया।
जब न्यूजीलैंड की टीम लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो भारतीय गेंदबाजों ने भी उतनी ही धार दिखाई। जसप्रीत बुमराह ने अपने घातक यॉर्कर और धीमी गेंदों से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया और 4 विकेट लेकर मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। उनके साथ अक्षर पटेल और अन्य गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिससे न्यूजीलैंड की टीम 19 ओवर में ही 159 रन पर ढेर हो गई।
हालांकि इस ऐतिहासिक जीत के पीछे सिर्फ खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही नहीं था। टीम के चयन और रणनीति में भी एक बड़ा दिमाग लगातार काम कर रहा था। वह व्यक्ति मैदान पर नजर नहीं आता, लेकिन उसके फैसलों का असर सीधे टीम की सफलता पर दिखाई देता है। वह नाम है भारतीय टीम के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का।
जुलाई 2023 में जब अजीत अगरकर को भारतीय टीम का मुख्य चयनकर्ता बनाया गया, तब टीम एक संक्रमण काल से गुजर रही थी। कई बड़े खिलाड़ी अपने करियर के अंतिम दौर में थे और टीम को नई दिशा देने की जरूरत थी। ऐसे समय में अगरकर ने कई ऐसे फैसले लिए जो शुरुआत में काफी विवादित लगे। लेकिन समय के साथ वही फैसले भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
अगरकर का सबसे बड़ा गुण यह रहा कि उन्होंने टीम चयन में साहस दिखाया। उन्होंने कई बार ऐसे फैसले लिए जिनकी आलोचना भी हुई, लेकिन उन्होंने अपने निर्णयों पर भरोसा बनाए रखा। उदाहरण के लिए टी20 टीम की कप्तानी को लेकर उन्होंने सूर्यकुमार यादव पर भरोसा जताया। उस समय कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि हार्दिक पंड्या इस भूमिका के लिए बेहतर विकल्प हो सकते थे, लेकिन चयन समिति ने अलग रास्ता चुना। बाद में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम ने आक्रामक और आधुनिक टी20 क्रिकेट खेलते हुए लगातार सफलता हासिल की।
अगरकर की चयन नीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू युवाओं को मौका देना था। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को टीम में जगह दी और उन्हें खुद को साबित करने का मौका दिया। ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और कई अन्य खिलाड़ियों को लगातार अवसर मिले। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह साबित करने के लिए काफी था कि चयन समिति की रणनीति कितनी सही थी।
ईशान किशन की टीम में वापसी भी एक बड़ा निर्णय था। कुछ समय तक टीम से बाहर रहने के बाद उन्हें फिर मौका दिया गया और उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि चयनकर्ताओं का भरोसा सही था। बड़े मैचों में उनका आत्मविश्वास और आक्रामक खेल भारतीय टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ।
अगरकर के कार्यकाल में भारतीय टीम ने लगातार बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत फाइनल तक पहुंचा था, हालांकि वहां उसे हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उस हार से टीम ने सबक लिया और अगले वर्षों में और भी मजबूत होकर सामने आई।
इसके बाद 2024 में भारत ने टी20 वर्ल्ड कप जीतकर एक लंबे अंतराल के बाद आईसीसी ट्रॉफी हासिल की। उस जीत ने भारतीय क्रिकेट में आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की। फिर 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर टीम ने यह साबित कर दिया कि उसकी सफलता कोई संयोग नहीं थी।
और अंततः 2026 में टी20 वर्ल्ड कप जीतकर भारत ने अपने स्वर्णिम दौर को और भी मजबूत कर दिया। लगातार बड़े टूर्नामेंट जीतना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, लेकिन भारतीय टीम ने यह करके दिखाया।
इस पूरी यात्रा में खिलाड़ियों की प्रतिभा, कोचिंग स्टाफ की मेहनत और टीम के भीतर का आत्मविश्वास तो महत्वपूर्ण था ही, लेकिन चयन समिति की दूरदृष्टि भी उतनी ही अहम रही। अजीत अगरकर ने यह दिखाया कि सही समय पर सही फैसले लेना कितना जरूरी होता है।
आज भारतीय क्रिकेट जिस मुकाम पर खड़ा है, वहां यह साफ दिखाई देता है कि टीम सिर्फ प्रतिभा के दम पर नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीति और मजबूत नेतृत्व के कारण भी आगे बढ़ रही है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की जीत इसी सोच और साहस का परिणाम है।
मैदान पर चमकते सितारों के पीछे अक्सर कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनका नाम कम लिया जाता है, लेकिन उनका योगदान बेहद बड़ा होता है। अजीत अगरकर भी उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने आलोचनाओं की परवाह किए बिना जो फैसले लिए, वही आज भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास की जीत है जो कठिन फैसले लेने का साहस रखता है और भविष्य की ओर देखने की दृष्टि भी। भारतीय क्रिकेट के इस नए स्वर्णिम दौर में अजीत अगरकर का योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
ईमेल: mahendratone@gmail.com
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