जेवर हवाई अड्डे से पहली उड़ान
-महेन्द्र तिवारी
उत्तर प्रदेश के विमानन और आर्थिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, जिसे जेवर हवाई अड्डे के नाम से भी जाना जाता है, से पहली व्यावसायिक उड़ान का सफल संचालन शुरू होना न केवल इस राज्य के लिए बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और लंबे समय से प्रतीक्षित पल है। इस पहली उड़ान के रनवे पर उतरते ही यह विशाल हवाई अड्डा आधिकारिक रूप से वैश्विक विमानन मानचित्र पर स्थापित हो गया है। लंबे समय से देखी जा रही यह महत्वाकांक्षी योजना अब धरातल पर हकीकत बनकर उतर चुकी है, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के विकास की दिशा और दशा को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। इस हवाई अड्डे का चालू होना आधुनिक बुनियादी ढांचे, आर्थिक प्रगति और सुदृढ़ कनेक्टिविटी का एक ऐसा अद्भुत संगम है, जो आने वाले कई दशकों तक देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देता रहेगा। उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के विशाल नेटवर्क के साथ एक नए वैश्विक निवेश और आर्थिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
विमानन उद्योग की दुनिया में कुछ ऐसी अनूठी और भव्य परंपराएं हैं जो इस क्षेत्र के सम्मान और गौरव को प्रदर्शित करती हैं। ऐसी ही एक अत्यंत प्रतिष्ठित वैश्विक परंपरा वॉटर कैनन सैल्यूट की है, जिसके माध्यम से किसी भी नए हवाई अड्डे पर पहली व्यावसायिक उड़ान का ऐतिहासिक स्वागत किया जाता है। जब उत्तर प्रदेश की ही राजधानी लखनऊ से उड़ान भरकर आई इंडिगो एयरलाइंस की पहली उड़ान ने जेवर हवाई अड्डे के नवनिर्मित रनवे पर पहली बार लैंड किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए वह दृश्य अत्यंत विहंगम और भावुक करने वाला था। हवाई अड्डे के अग्निशमन दल के वाहनों ने रनवे के दोनों छोरों पर तैनात होकर पानी की तीव्र बौछारें छोड़ीं और हवा में एक अत्यंत सुंदर और विशाल आर्च का निर्माण किया। पानी की इस भव्य बौछार के बीच से गुजरते हुए विमान का स्वागत करना केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक नए और सुनहरे युग के उदय का भव्य शंखनाद था। यह सम्मान और उत्सव का वह क्षण था जिसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पिछले कई वर्षों से हवाई यात्रियों और उड़ानों के भारी दबाव का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ती जनसंख्या और हवाई यात्रा के प्रति आम लोगों के बढ़ते रुझान के कारण दिल्ली हवाई अड्डे की क्षमताएं अपनी चरम सीमा पर पहुंच रही थीं, जिससे उड़ानों में देरी और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं आम हो गई थीं। ऐसे में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन शुरू होना दिल्ली हवाई अड्डे के लिए सबसे मजबूत, प्रभावी और आवश्यक विकल्प के रूप में सामने आया है। इसके पूरी तरह चालू होने से दिल्ली हवाई अड्डे पर विमानों के हवाई ट्रैफिक और यात्रियों की लंबी कतारों का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। इसका सबसे सीधा और बड़ा लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा और मेरठ के साथ-साथ पड़ोसी राज्य हरियाणा के कई प्रमुख शहरों के निवासियों को मिलेगा। अब इन क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को कोई भी अंतरराष्ट्रीय या घरेलू उड़ान पकड़ने के लिए दिल्ली के भारी ट्रैफिक और जाम से जूझते हुए जाने की मजबूरी नहीं होगी, बल्कि वे सीधे जेवर आकर बेहद कम समय में अपनी सुखद यात्रा शुरू कर सकेंगे।
इस हवाई अड्डे के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की विशाल योजनाओं का यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो इसका मास्टर प्लान अत्यंत विशाल और विस्मयकारी दिखाई देता है। वर्तमान समय में इस हवाई अड्डे के पहले चरण का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हुआ है, जिसके अंतर्गत 1 रनवे और 1 अत्याधुनिक विशाल टर्मिनल का संचालन शुरू किया गया है। लेकिन यह विशाल परियोजना की केवल एक छोटी सी शुरुआत है। आने वाले वर्षों में जब इसके सभी निर्धारित चरण चरणबद्ध तरीके से पूरे हो जाएंगे, तो यह भारत का सबसे बड़ा और पूरे एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शीर्ष स्थान पर गिना जाएगा। भविष्य की योजनाओं के अनुसार यहां कुल 5 से 6 रनवे बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इसकी वार्षिक यात्री वहन क्षमता कई करोड़ तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही, यह हवाई अड्डा आधुनिकतम डिजिटल तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे समन्वय पर आधारित है। इसे पूरी तरह से एक डिजिटल और ग्रीन एयरपोर्ट के सिद्धांत पर विकसित किया जा रहा है, जिसका मुख्य संकल्प शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करना है, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
इस महा-परियोजना के विधिवत शुरू होने से यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, नोएडा और उनके आसपास के तमाम क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को एक नई और अभूतपूर्व ऊर्जा मिलेगी। इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यह पहले से ही एक बड़े औद्योगिक गलियारे के रूप में अपनी पहचान बना रहा था, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आगमन ने यहां वैश्विक निवेश की एक बड़ी बाढ़ ला दी है। रीयल एस्टेट के क्षेत्र में इसके कारण एक बहुत बड़ा और सकारात्मक उछाल साफ देखा जा सकता है। हवाई अड्डे के आसपास के सभी कमर्शियल और रेजिडेंशियल इलाकों में जमीनों और संपत्तियों की मांग रातों-रात आसमान छूने लगी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिली है। दुनिया भर के बड़े औद्योगिक घराने और घरेलू कॉर्पोरेट समूह यहां अपने बड़े प्रोजेक्ट, मॉल, विश्वस्तरीय होटल और व्यावसायिक परिसर स्थापित करने के लिए निवेश कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र के शहरीकरण को एक नया और वैश्विक रूप प्रदान कर रहा है।
यात्रियो की सुगम आवाजाही के अलावा यह हवाई अड्डा उत्तर भारत के व्यापार, वाणिज्य और भारी उद्योगों के लिए भी एक मजबूत रीढ़ की हड्डी साबित होने जा रहा है। जेवर हवाई अड्डे को एक विशाल और अत्याधुनिक मल्टी-मोडल कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इसके कारण पूरे क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा उद्योग और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्थानीय लघु और मध्यम उद्योगों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए भी यह हवाई अड्डा किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वे अपने फल, सब्जियां और अन्य निर्मित वस्तुओं को बिना समय गंवाए सीधे वैश्विक बाजारों तक सुरक्षित निर्यात कर सकेंगे। रोजगार के मोर्चे पर भी यह परियोजना एक अभूतपूर्व क्रांति लेकर आई है। हवाई अड्डे के दैनिक संचालन, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा व्यवस्था, रिटेल आउटलेट्स, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और परिवहन व्यवस्था में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य को संवारने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
पर्यटन उद्योग के दृष्टिकोण से भी नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का महत्व अत्यंत अद्वितीय और दूरगामी है। यह हवाई अड्डा विश्व के प्रसिद्ध पर्यटन केंद्रों जैसे आगरा के ऐतिहासिक ताजमहल, मथुरा और वृंदावन की पावन सांस्कृतिक भूमि के बेहद नजदीक स्थित है। अब तक विदेशों से आने वाले पर्यटकों को इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए पहले दिल्ली में उतरना पड़ता था और फिर सड़क मार्ग की लंबी और थकान भरी यात्रा करनी पड़ती थी। अब जेवर हवाई अड्डे के चालू होने से उन्हें इन समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों तक पहुंचने के लिए एक सीधा, सुगम और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रवेश द्वार मिल गया है, जिससे क्षेत्र के पर्यटन राजस्व में भारी वृद्धि तय है। यात्रियों की यात्रा को और अधिक निर्बाध बनाने के लिए सरकार इस हवाई अड्डे को यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी देश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं से सीधे जोड़ रही है। इसके साथ ही भविष्य में इसे रैपिड रेल नेटवर्क और अत्याधुनिक पॉड टैक्सी जैसी उन्नत प्रणालियों से भी पूरी तरह एकीकृत किया जाएगा।
निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली कमर्शियल उड़ान की इस ऐतिहासिक शुरुआत ने केवल एक हवाई जहाज को आकाश में नहीं उड़ाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं, स्थानीय व्यापार और इस पूरे क्षेत्र के बहुआयामी विकास को सचमुच समृद्धि के नए पंख लगा दिए हैं। यह हवाई अड्डा आने वाले स्वर्णिम समय में आत्मनिर्भर भारत और एक आधुनिक, प्रगतिशील उत्तर प्रदेश की सबसे भव्य वैश्विक पहचान बनकर उभरेगा।
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