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इबोला के खतरे के बीच सतर्क हुआ भारत

 

इबोला के खतरे के बीच सतर्क हुआ भारत


-महेन्द्र तिवारी 


अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला विषाणु के नए और बेहद खतरनाक प्रकोप ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से चिंता और सतर्कता की स्थिति में ला खड़ा किया है। युगांडा और कांगो जैसे देशों में तेजी से फैल रहे इस घातक संक्रमण को देखते हुए भारत ने भी अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और विशेषकर हवाई अड्डों पर निगरानी को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने नई और सख्त मानक संचालन प्रक्रिया लागू करते हुए विमानन कंपनियों और हवाई अड्डा प्रशासन को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित संक्रमित व्यक्ति की समय रहते पहचान करना और इस बीमारी को देश के भीतर फैलने से रोकना है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई 2026 को इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया। संगठन के अनुसार कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे संक्रमण ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 246 संदिग्ध मामले और 80 मौतें दर्ज की गई थीं, लेकिन बाद में यह संख्या लगातार बढ़ती चली गई। कई रिपोर्टों में 600 से अधिक संदिग्ध मामलों और 139 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया है। कुछ ताजा रिपोर्टों में 900 से अधिक संदिग्ध मामलों और 220 संभावित मौतों की भी आशंका जताई गई है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण बंडिबुग्यो प्रकार के इबोला विषाणु से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार को बेहद खतरनाक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसके लिए अब तक कोई स्वीकृत और पूरी तरह प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी स्वीकार किया है कि इस प्रकार के संक्रमण के लिए अभी केवल सहायक उपचार ही संभव है। यही कारण है कि संक्रमित व्यक्ति की जल्दी पहचान और उसे तुरंत अलग करना सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। 

भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े हवाई अड्डों पर अतिरिक्त स्वास्थ्य दल तैनात किए गए हैं। अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की उष्मीय जांच की जा रही है ताकि बुखार या संक्रमण के शुरुआती संकेत तुरंत पकड़े जा सकें। यात्रियों से स्वास्थ्य घोषणा पत्र भी भरवाए जा रहे हैं जिनमें उनकी पिछली यात्राओं और स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित जानकारी ली जा रही है। 

इबोला का सबसे खतरनाक पहलू इसका लंबा उद्भवन काल माना जाता है। संक्रमण के बाद लक्षण सामने आने में 2 से 21 दिन तक का समय लग सकता है। इस दौरान संक्रमित व्यक्ति सामान्य दिखाई दे सकता है लेकिन वह दूसरों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है। इसी कारण भारत में आने वाले यात्रियों की पिछले 1 महीने की यात्रा जानकारी को बारीकी से जांचा जा रहा है। यदि कोई यात्री हाल में प्रभावित देशों में गया हो या वहां से होकर आया हो तो उस पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। 

हवाई अड्डों पर विशेष पृथक कक्ष बनाए गए हैं ताकि किसी यात्री में लक्षण मिलने पर उसे तुरंत सामान्य लोगों से अलग किया जा सके। ऐसे यात्रियों के रक्त और अन्य नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों और नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे संक्रमण से सुरक्षित रहते हुए मरीजों का इलाज कर सकें। सुरक्षात्मक कपड़े, दस्ताने और उच्च गुणवत्ता वाले मास्क के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। 

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने विमानन कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। यदि उड़ान के दौरान कोई यात्री अचानक तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाता है तो चालक दल को तुरंत वायु यातायात नियंत्रण और स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना देनी होगी। कुछ मामलों में संदिग्ध यात्रियों को विमान में अलग सीटों पर बैठाने और उनके संपर्क में आए यात्रियों की जानकारी सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे संपर्क किया जा सके। 

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इबोला दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलती है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द होता है। बाद में उल्टी, दस्त और गंभीर स्थिति में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव शुरू हो सकता है। यही कारण है कि शुरुआती पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 

युगांडा और कांगो में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कई स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों, सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं और स्थानीय अविश्वास के कारण संक्रमण को नियंत्रित करना बेहद कठिन हो रहा है। कुछ इलाकों में उपचार केंद्रों पर हमले तक किए गए हैं जिससे राहत कार्य प्रभावित हुए हैं। 

विशेषज्ञों का मानना है कि आज की दुनिया पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और व्यापार के कारण कोई भी संक्रमण कुछ घंटों में दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर और यूरोप के कई देशों ने भी यात्रियों की अतिरिक्त जांच और निगरानी शुरू कर दी है। कई देशों ने प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा को लेकर चेतावनी भी जारी की है। 

भारत में फिलहाल इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है लेकिन सरकार कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। कोविड महामारी के दौरान मिले अनुभवों के आधार पर इस बार पहले से ही तैयारी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है ताकि ताजा जानकारी मिलती रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति हाल में प्रभावित देशों से लौटा हो और उसे बुखार, कमजोरी, उल्टी या रक्तस्राव जैसे लक्षण महसूस हों तो उसे तुरंत अस्पताल जाकर जांच करानी चाहिए। बीमारी को छिपाना या इलाज में देरी करना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को हाथों की सफाई, संक्रमित व्यक्ति से दूरी और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। 

इबोला के बढ़ते मामलों ने दुनिया को एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को हर समय तैयार रहना चाहिए। महामारी केवल स्वास्थ्य संकट नहीं होती बल्कि वह सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक चुनौती भी बन जाती है। यदि समय रहते तैयारी न की जाए तो छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट में बदल सकती है। फिलहाल भारत की कोशिश यही है कि यह बीमारी देश की सीमाओं तक पहुंचे ही नहीं और यदि कोई मामला सामने आए भी तो उसे तुरंत नियंत्रित किया जा सके ताकि देश की जनता सुरक्षित रह सके।

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