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लोकलुभावन बजट

 
लिमटी की लालटेन 750
लोकलुभावन बजट, युवाओं को रोजगार नहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि जैसे क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं नदारत!
विपक्ष युवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार आदि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने का प्रयास करेगा या सदन से बर्हिगमन का आसान रास्ता अख्तियार करेगा!
(लिमटी खरे)
निर्मला सीतारमण के खाते में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है कि वे पहली ऐसी महिला वित्त मंत्री हैं जिन्होंने लगातार नवीं बार आम बजट पेश किया है। उन्होंने 2019 से अब तक वैसे तो आठ साल तक वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला है पर 2024 में उन्होंने अंतरिम और पूर्ण दोंने ही बजट पेश किए थे। इसके पहले मोरारजी देसाई के द्वारा दस बार तो पी. चिदंबरम ने नौ बार बजट पेश किया है, पर लगातार 09 बार बजट पेश करने वाली इकलौती व महिला वित्त मंत्री बन चुकी हैं निर्मला सीतारमण।
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भारत का आम बजट केवल आय-व्यय का सरकारी दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा, विकास माडल और सरकार की प्राथमिकताओं का आईना भी होता है। आम बजट 2026 भी ऐसे समय में प्रस्तुत हुआ जब भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, घरेलू महंगाई, रोजगार की जरूरत और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे कई मोर्चों पर खड़ा है।
इस बजट को लेकर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर सरकार इसे विकासोन्मुख, निवेश प्रोत्साहन और गरीब-हितैषी बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ आर्थिक विशेषज्ञ इसे संतुलन से दूर और कुछ वर्गों के लिए निराशाजनक बता रहे हैं।
सबसे पहले चर्चा करते हैं बजट के उजले पक्ष पक्ष अर्थात सकारात्मक पहलुओं पर। आम बजट 2026 में सरकार ने विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, स्टार्टअप और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखने का प्रयास किया है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास के साथ समावेशन की नीति को मजबूत करता है। बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने, रोजगार सृजन, टेक्नोलॉजी निवेश और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह बजट वास्तव में आम जनता के जीवन स्तर में तत्काल सुधार ला पाएगा या केवल दीर्घकालिक आर्थिक ढांचे को मजबूत करेगा।
इस बजट में आधारभूत संरचनाओं पर निवेश को केंद्र में रखा गया है। इसमें सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और शहरी विकास के लिए भारी निवेश का प्रावधान किया गया है। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को अक्सर आर्थिक विकास का इंजन माना जाता है और सरकार इसी रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।
बजट में डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष योजनाएं शामिल की गई हैं। यह भारत को टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दशक में डिजिटल सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सकता है। सके अलावा सरकार ने कृषि टेक्नोलॉजी, सिंचाई, फूड प्रोसेसिंग और किसान क्रेडिट पर ध्यान दिया है। यदि इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन होता है तो किसानों की आय बढ़ सकती है एवं कृषि उत्पादन में सुधार हो सकता है।
भले ही बड़ी टैक्स राहत नहीं दी गई हो, लेकिन कुछ अप्रत्यक्ष राहत और निवेश प्रोत्साहन योजनाएं शामिल की गई हैं। सरकार का तर्क है कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती से मध्यम वर्ग को फायदा मिलेगा। इसमें राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का प्रयास किया गया है तो दूसरी ओर सरकार ने घाटे को नियंत्रित रखने का लक्ष्य रखा है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है और इससे भारत की आर्थिक साख मजबूत हो सकती है।
महिला सशक्तिकरण और लखपति दीदी योजना को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूहों के लिए ऋण सीमा बढ़ाना और लखपति दीदी योजना का विस्तार करना एक सामाजिक रूप से प्रगतिशील कदम है। यह केवल कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास का मॉडल है।
अब बात की जाए इसके अंधियारे पक्ष अर्थात नकारात्मक पहलुओं पर, विपक्ष का मानना है कि इसमें मध्यम वर्ग को सीमित राहत दी गई है। आयकर में बड़ी राहत नहीं मिली, महंगाई से राहत के लिए सीधे कदम कम दिखे, जबकि मध्यम वर्ग लंबे समय से टैक्स कटौती की उम्मीद कर रहा था।
वहीं, रोजगार पर स्पष्ट रोडमैप की कमी भी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश रोजगार बढ़ा सकता है, लेकिन सीधे नौकरी सृजन योजनाएं कम दिखीं एवं युवाओं के लिए स्किल आधारित रोजगार नीति पर ज्यादा स्पष्टता नहीं है। महंगाई नियंत्रण पर कम फोकस देखने को मिला, आलोचकों का कहना है कि खाद्य महंगाई, ईंधन लागत, रोजमर्रा खर्च जैसे जनता से सीधे जुड़े मसलों पर बजट में सीधी राहत कम दिखती है।
विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च को बढ़ाया जा सकता था। सरकार इस बजट को विकास पर केंद्रित तो विपक्ष इसे कार्पोरेट फ्रेंडली निरूपित कर रहा है। इसमें युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार कमजोर ही नजर आई है। किसानों को आय की स्थायी सुरक्षा चाहिए,पर नहीं मिली।
जहाँ एक ओर बजट में भविष्य की चमक है, वहीं दूसरी ओर वर्तमान की कई ज्वलंत समस्याओं की अनदेखी भी की गई है। आलोचकों और विपक्ष द्वारा कहा जा रहा है कि निशुल्क योजनाओं के बजाए युवाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में सरकार पूरी तरह विफल ही दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर यह बजट लोगों की आशाओं के अनुरूप तो किसी भी दृष्टिकोण से दिखाई नहीं दे पा रहा है। इसमें सीनियर सिटीजन्स के लिए योजनाएं नगण्य ही हैं। अब सदा की तरह ही सत्ताधारी इसे लोक लुभावन तो विपक्ष निराशाजनक बजट निरूपित करेंगे, पर यक्ष प्रश्न तो यही खड़ा है कि क्या विपक्ष के द्वारा सक्षम मंच अर्थात देश की सबसे बड़ी पंचायत में सरकार को युवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार आदि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने का प्रयास करेगा अथवा हर बार की तरह ही इस बार भी बहिर्गमन का आसान रास्ता अपनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेगा . . .
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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)
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